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हरियाणा के 60 साल पूरे, CM नायब सैनी बोले- मेहनत के दम पर देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हुआ प्रदेश

कुरुक्षेत्र
 मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि प्रदेश के 60 वर्ष पूर्ण करने के इस अवसर पर राष्ट्रपति का आशीर्वाद मिल रहा है, जो ऐतिहासिक अवसर है। हरियाणा ने 6 दशक में अप्रत्याशित प्रगति की है और इसमें प्रदेश के हर वर्ग का बहुमूल्य योगदान है। वे रविवार को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के सभागार में हीरक जयंती के राज्य स्तरीय समारोह में बतौर विशिष्ट अतिथि बोल रहे थे।

उन्होंने कहा कि हरियाणा की धरती को मेहनती किसान, बहादुर जवान, धाकड़ खिलाड़ी और सशक्त नारी ने अपनी मेहनत के दम पर बुलंद हरियाणा बनाया है। हरियाणा को 1966 में पिछड़ा कहा जाता था, लेकिन आज देश के अग्रणी राज्यों में शुमार है। यह सब किसान, व्यापारी, खिलाड़ी, उद्योगपतियों और माताओं की मेहनत का परिणाम है।

प्रदेश की बेटियां खेत से लेकर खेल के मैदान तक और सेना से लेकर स्टार्टअप तक में प्रदेश व देश का मान बढ़ा रही हैं। इसी कारण हमारे यहां कहावत मशहूर है – देशां म्है देश हरियाणा-जित दूध दही का खाणा। मुख्यमंत्री सैनी ने कहा कि जब-जब देश का तिंरगा विश्व स्तर पर लहराता है तो उसमें हरियाणा की माटी की खुशबू जरूर होती है।

हरियाणा क्षेत्रफल में भले छोटा है और देश के क्षेत्रफल का केवल 1.34 प्रतिशत है, लेकिन देश की जीडीपी में हरियाणा का योगदान 3.6 प्रतिशत है। प्रति व्यक्ति आय में भी प्रदेश सबसे अधिक है। देश की हर तीन में से दो कारें, हर दूसरा ट्रैक्टर और 10 में से 6 मोटरसाइकिल हरियाणा की देन हैं। आज हरियाणा की पहचान सड़क, खेल और थाली हैं

1966 में संघर्ष कर रहे थे आज सेलिब्रेट कर रहे
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष ने अपने कहा कि 1966 में जब हरियाणा बना तो प्रदेश और प्रदेशवासी संघर्ष कर रहे थे। आज 6 दशक हो चुके हैं, लेकिन आज प्रदेश और प्रदेशवासी सेलिब्रेट कर रहे हैं। यह सब प्रदेशवासियों की अथक मेहनत को दर्शाता है।

इसके लिए मुख्यमंत्री और उनकी टीम भी बधाई की पात्र है, जो डेडिकेशन के साथ काम कर रही है। मुख्यमंत्री सैनी जनता से जो कमिटमेंट करते हैं, उसे पूरा करते हैं। कृषि से लेकर तकनीक तक सभी में हरियाणा मजबूत है और 2047 के विकसित भारत के सपने को पूरा करने में हरियाणा सबसे आगे चल रहा है।

आचार्य देवव्रत ने प्रस्तुत किया गुरुकुल की उपलब्धियों का लेखा-जोखा
गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने राष्ट्रपति को गुरुकुल कुरुक्षेत्र के गौरवशाली इतिहास, संस्थापक स्वामी श्रद्धानंद के महान संकल्प और वर्तमान में संस्थान की शैक्षणिक एवं अन्य उपलब्धियों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि गुरुकुल कुरुक्षेत्र ने पिछले दस वर्षों में एनडीए के माध्यम से 100 से अधिक उच्च सैन्य अधिकारी देश को समर्पित किए हैं।

इसके अतिरिक्त मेडिकल, आईआईटी, एनआइटी एवं आईआईआईटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में गुरुकुल के 150 से अधिक प्रतिभाशाली विद्यार्थियों ने स्थान प्राप्त कर संस्थान का गौरव बढ़ाया है। गुरुकुल का प्राकृतिक कृषि फार्म भी रसायनमुक्त खेती के माध्यम से देश-विदेश के किसानों को नई दिशा प्रदान कर रहा है।

राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष ने स्वामी श्रद्धानंद के त्याग और साहस को किया नमन
हरियाणा के राज्यपाल प्रोफेसर असीम कुमार घोष ने स्वामी श्रद्धानंद को श्रद्धासुमन अर्पित किए। उन्होंने कहा कि स्वामी श्रद्धानंद का जीवन अदम्य साहस, त्याग, तपस्या और राष्ट्र के प्रति अटूट समर्पण की प्रेरक गाथा है।

शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का सशक्त माध्यम मानते हुए गुरुकुल की स्थापना की और भारतीय संस्कृति एवं वैदिक परंपराओं के संरक्षण के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर दिया। उनका बलिदान हमें सत्य, साहस और अपने सिद्धांतों पर अडिग रहने की प्रेरणा देता है।

स्वामी श्रद्धानंद को बताया सामाजिक जागरण का महान अग्रदूत
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने स्वामी श्रद्धानंद को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि स्वामी ने ऐसे समय में समाज को नई दिशा देने का कार्य किया, जब देश अनेक सामाजिक कुरीतियों, अशिक्षा और पराधीनता की चुनौतियों से जूझ रहा था। उन्होंने शिक्षा, सामाजिक सुधार और राष्ट्र जागरण को अपने जीवन का ध्येय बनाया।

गुरुकुल की स्थापना के माध्यम से उन्होंने भारतीय शिक्षा व्यवस्था को नई पहचान दी और यह सिद्ध किया कि शिक्षा का आधार संस्कार, चरित्र, स्वाभिमान और राष्ट्रभक्ति होना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वामी श्रद्धानन्द का बलिदान केवल एक महापुरुष का बलिदान नहीं, बल्कि राष्ट्र और समाज को जागृत करने वाले विचारों की अमर विरासत है।

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