राजनीतिक

राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस की बाड़ाबंदी! महेश केवट की उम्मीदवारी से बढ़ी हलचल, विधायक रहेंगे निगरानी में

भोपाल
 मध्यप्रदेश की राजनीति में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी द्वारा तीसरी राज्यसभा सीट पर महेश केवट को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद मुकाबला अब पूरी तरह रोचक और प्रतिष्ठा का विषय बन गया है। भाजपा के इस दांव के बाद कांग्रेस भी पूरी तरह सतर्क हो गई है और अपने विधायकों को एकजुट रखने के लिए विशेष रणनीति पर काम कर रही है। कांग्रेस की राज्यसभा प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन सोमवार को अपना नामांकन दाखिल करेंगी। इस अवसर पर प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह सहित पार्टी के सभी विधायक मौजूद रहेंगे। कांग्रेस ने अपने विधायकों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे नामांकन प्रक्रिया में शामिल रहें, ताकि एकजुटता का संदेश दिया जा सके।

भाजपा के तीसरे उम्मीदवार की घोषणा के बाद राजनीतिक गलियारों में विधायकों की संभावित खरीद-फरोख्त को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। इसी आशंका के मद्देनजर कांग्रेस अपने विधायकों की बाड़ाबंदी करने की तैयारी में है। सूत्रों के अनुसार पार्टी अपने विधायकों को कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरू या तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद स्थित किसी रिसॉर्ट में ठहरा सकती है। मतदान की तारीख 18 जून तक सभी विधायकों को वहीं रखा जाएगा और फिर सीधे मतदान के लिए मध्यप्रदेश विधानसभा लाया जाएगा।

मध्य प्रदेश में शुरू होगा पॉलिटिकल ड्रामा
देर रात सीएम हाउस में राज्यसभा उम्मीदवार को लेकर मंत्रणा होती रही. इस दौरान ओबीसी, एससी-एसटी और आदिवासी वर्ग के नामों पर भी विचार किया गया लेकिन अंत में पिछड़ा वर्ग से आने वाले महेश केवट के नाम पर सहमति बन गई. महेश केवट वर्तमान में मछुआ कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष हैं. उनके नाम की घोषणा के बाद मध्य प्रदेश में पॉलिटिकल ड्रामा निश्चित है क्योंकि कांग्रेस के पास राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए तय मतों से अतिरिक्त विधायक तो हैं, पर कुछ विधायकों को लेकर कांग्रेस संशय में है। 

बीजेपी के तीसरे उम्मीदवार से क्यों परेशान हुई कांग्रेस?
दरअसल, मध्य प्रदेश में राज्यसभा की तीसरी सीट पर बीजेपी के तीसरे उम्मीदवार की घोषणा के बाद कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन की राह कुछ मुश्किल नजर आ रही है. उन्हें राज्यसभा भेजने के लिए कांग्रेस के पास चार विधायक ही अतिरिक्त हैं. राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए प्रथम प्राथमिकता वाले 58 मतों की जरूरत होती है. कांग्रेस के विधायक तो 64 हैं, मगर श्योपुर के विजयपुर विधायक मुकेश मल्होत्रा के मतदान पर हाईकोर्ट की रोक है और सागर जिले की बीना सीट से विधायक निर्मला सप्रे को लेकर कांग्रेस पहले ही कह चुकी है कि वे बीजेपी के साथ हैं। 

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि उनके सभी विधायक पूरी तरह एकजुट हैं और मीनाक्षी नटराजन का राज्यसभा पहुंचना तय है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के पास विधायकों की खरीद-फरोख्त के लिए असीमित संसाधन हैं, लेकिन कांग्रेस अपने जनप्रतिनिधियों के साथ मजबूती से खड़ी है।

इस बीच मीनाक्षी नटराजन ने भी राजनीतिक संपर्क अभियान तेज कर दिया है। उन्होंने रविवार को पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव के निवास पर पहुंचकर मुलाकात की। इस दौरान विधायक सचिन यादव भी मौजूद रहे। इसके अलावा उन्होंने कई अन्य कांग्रेस विधायकों से भी संपर्क साधा।

बीजेपी के पास 48 मत अधिक
राज्यसभा के लिए मध्य प्रदेश भाजपा की राह काफी आसान है. दरअसल, बीजेपी के विधायक 164 हैं, इनमें से 116 मतों के साथ बीजेपी आसानी से अपने दो राज्यसभा सदस्यों को जिता लेगी, जिसके बाद पार्टी के पास 48 मत अतिरिक्त हैं. यहीं पर पॉलिटिकल ड्रामा देखने मिल सकता है. क्योंकि कांग्रेस की निर्मला सप्रे और भारत आदिवासी पार्टी के विधायक कमलेश डोडियार के मतों को मिलाकर बीजेपी के पास अतिरिक्त मत 50 हो जाएंगे और तीसरी राज्यसभा सीट जीतने के लिए उसे सिर्फ 8 सीटों की जरूरत होगी, ऐसे में कांग्रेस को डर है कि बीजेपी कांग्रेसे खेमे में सेंध लगा सकती है। 

बाड़बंदी के साथ विधायकों को शिफ्ट कर सकती है कांग्रेस
बीजेपी को राज्यसभा की तीसरी सीट जीतने के लिए 8 सीटों की जरूरत होगी, इसके लिए बीजेपी ने तैयारियां भी जोरों पर की है. यही वजह है कि कांग्रेस खेमे में खलबली मची हुई है. मध्य प्रदेश कांग्रेस अपने विधायकों की बाड़बंदी कर सकती है और राज्यसभा चुनावों तक उन्हें किसी अन्य राज्य में शिफ्ट भी कर सकती है. हालांकि, मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने दावा करते हुए कहा, " कांग्रेस पूरी तरह एकजुट है और राज्यसभा चुनाव में किसी तरह की क्रॉस वोटिंग या असंतोष की स्थिति नहीं है. कांग्रेस पार्टी की उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन राज्यसभा जाएंगी। 

कौन हैं बीजेपी के महेश केवट?
बीजेपी नेता महेश केवट मूल रूप से मध्य प्रदेश के निवाड़ी जिला (ओरछा) से आते हैं. वे वर्तमान में मछुआ कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष हैं, उन्हें हाल ही में 6 मई को बोर्ड का अध्यक्ष बनाया गया था. वे बीजेपी में पूर्व जिला उपाध्यक्ष टीकमगढ़, पूर्व जिला मंत्री टीकमगढ़ और पूर्व राष्टीय कार्यसमिति सदस्य भी रह चुके हैं. मध्य प्रदेश से महेश केवट के साथ कर्नाटक के उम्मीदवारों की भी घोषणा की गई है। 

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